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पिछली बार 10 सीटों पर नोटा का असर सबसे ज्यादा रहा, इनमें से 9 सीटें आदिवासी बहुल

  • शहरी आबादी की बजाय आदिवासी वोटरों वाली सीटों पर नोटा के अधिकार का ज्यादा इस्तेमाल हो रहा
  • पिछले लोकसभा चुनाव में 10 सीटों पर 30 हजार से 46 हजार के बीच नोटा के वोट पड़े
  • इन 10 सीटों में से तमिलनाडु की नीलगिरी सीट छोड़कर बाकी सीटों पर आदिवासी आबादी 26% से 76% के बीच

नई दिल्ली. 2014 के लोकसभा चुनाव में पहली बार नोटा यानी ‘नन ऑफ द अबव’ का इस्तेमाल किया गया था। पिछले चुनावों में 83.41 करोड़ में से 55.38 करोड़ (66.4%) मतदाताओं ने 543 सीटों पर वोट डाले थे। इनमें से करीब 60 लाख वोट नोटा यानी ‘इनमें से कोई नहीं’ को पड़े थे। यह कुल वोटों का 1.1% था। 2014 में नोटा को सबसे ज्यादा 46,559 वोट तमिलनाडु की नीलगिरी सीट पर मिले थे, जबकि सबसे कम 123 वोट लक्षद्वीप सीट पर पड़े थे।

आदिवासी इलाकों पर नोटा को ज्यादा वोट मिले
2014 के आम चुनावों में जिन 10 सीटों पर नोटा का वोट प्रतिशत सबसे ज्यादा रहा, उनमें से 9 सीटें आदिवासी बहुल हैं। इनमें से भी 7 सीटें ऐसी थीं, जहां आदिवासियों की आबादी 50% से ज्यादा है।