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👉डीएम साहब एक निगाह काजू ग्राम सभा के निवासियों की ओर👉बारिश के इन दिनों में कैसे बीत रहे हैं दिन और कैसे बीतती है रात👉छत की छाया नहीं, पन्नी से भी टपकता है पानी, दीवाल कब गिर जाए इसका भरोसा नहीं-👉 पात्र ग्रामीणों ने प्रधानपति पर लगाया सीधा आरोप 20000 रुपये के बिना नहीं मिलेगा आवास योजना का लाभ-सुविधा शुल्क के बल पर अपात्रों ने लिया है आवास योजना का लाभ-

जनपद कौशांबी-✍️ डीएम साहब एक नजर काजू ग्राम सभा क्षेत्र के गरीबों की ओर। यहां सरकार की योजनाओं का लाभ वही पा सकता है जिसके पास गरीबी न हो।👉छत की छाया नहीं, पन्नी से भी टपकता है पानी, दीवाल कब गिर जाए इसका भरोसा नहीं—– यदि जिम्मेदारों को सुविधा शुल्क की रकम देने की क्षमता नहीं है तो योजनाओं का लाभ गरीब पात्र को मिलना नामुमकिन ही नहीं बल्कि टेढ़ी खीर है। यह दर्द काजू ग्राम सभा के मजरा हौसी गांव के उन गरीब लोग लोगों का है जो छप्परनुमा ऐसे मकान में जीवन यापन करने को मजबूर हैं कि वह कब साथ छोड़ दे इसका कोई भरोसा नहीं है, नन्हे मुन्ने बच्चों के साथ किसी तरह जीवन यापन करने वाले यह गरीब गांव की मुखिया से सरकार द्वारा संचालित आवास योजना का लाभ पाने के लिए एक नहीं पच्चासों बार फरियाद लगाते -लगाते थक हार गए लेकिन मुखिया की खाऊ कमाऊ नीति की डिमांड न पूरी होने पर यह गरीब योजनाओं का लाभ पाने से वंचित है।
जिक्र करें तो गांव के गरीब पात्र अजमेर सिंह पुत्र हरीविलास सिंह, राम चरन पुत्र बच्चा लाल आदि लोगों का आरोप है कि उन्हें आवास योजना का लाभ ना देकर गांव के प्रधान उन अपात्र लोगों को आवास योजना का लाभ मोटी रकम सुविधा शुल्क के रूप में लेकर दे रहे हैं जिनके पास हर सुविधाएं मौजूद है। यह भी आरोप है कि यदि इसका विरोध गरीब पात्र लोग करते हैं तो जिम्मेदार द्वारा यह भी कहने से गुरेज नहीं किया जाता है कि मुझे प्रधानी करते हुए साढ़े 3 वर्ष बीत गए हैं जितना कमाना था कमा लिया है अधिकारियों से शिकायत करोगे तो थोड़ा बहुत पैसा खर्च होगा इसके अलावा और कुछ नहीं होगा इससे अच्छा है कि 20000 रुपये की व्यवस्था करो तो आवास योजना का लाभ मिल सके जिम्मेदार के इस तरह के बातों को लेकर गांव के गरीब जहां मायूस हैं वहीं उनमें आक्रोश भी व्याप्त है लोग तो यहां तक कहने से गुरेज नहीं करते हैं कि सरकार गरीबों के लिए योजनाओं का संचालन करती है लेकिन भ्रष्टाचार के समंदर में डूबे ऐसे लोग जो सरकार की छवि को धूमिल करने में किसी भी तरह का परहेज नहीं करते हैं।

ब्यूरो रिपोर्ट – आशीष पांडेय चरवा, कौशाम्बी