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माननीय मुख्यमंत्री जी की सख्ती के बाद शाहबेरी अवैध निर्माण मामले में सक्रिय हुए सरकारी अमले ने ऐसे २२ पुलिसकर्मियों के नाम पता कर लिये हैं जो जिम्मेदार हैं। हालांकि प्रशासन और प्राधिकरण के वो अधिकारी अभी भी अज्ञात ही हैं जो वास्तव में जिम्मेदार हैं।

शाहबेरी मामला
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गले तलाशे जा रहे हैं फंदे के हिसाब से
मुख्यमंत्री की सख्ती के बाद शाहबेरी अवैध निर्माण मामले में सक्रिय हुए सरकारी अमले ने ऐसे २२ पुलिसकर्मियों के नाम पता कर लिये हैं जो जिम्मेदार हैं। हालांकि प्रशासन और प्राधिकरण के वो अधिकारी अभी भी अज्ञात ही हैं जो वास्तव में जिम्मेदार है।
१९ जुलाई को मैंने लिखा था कि शाहबेरी के अवैध निर्माण में शामिल भूमाफियाओं में पिछले आठ वर्षों में यहां तैनात रहे पुलिस, प्रशासन और प्राधिकरण के अधिकारी शामिल हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती से शाहबेरी मामले के जिम्मेदार भूमाफियाओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई हैं।२२ पुलिसकर्मियों को भी चिन्हित किया गया है जो २०११ के बाद यहां तैनात रहे हैं। इनमें थाना बिसरख के प्रभारी निरीक्षक से लेकर बीट कांस्टेबल तक शामिल हैं। क्या कोई पुलिस उपाधीक्षक स्तर का अधिकारी इस मामले के लिए जिम्मेदार नहीं है? कप्तान और सहायक कप्तान को जिम्मेदार क्यों नहीं माना जाना चाहिए? प्रशासन और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों को क्यों निर्दोष मान लिया गया है? दरअसल फंदे के हिसाब से गले तलाश लिये गये हैं। ग्रेटर नोएडा (पश्चिम) के एक भूमाफिया ने निजी बातचीत में बताया कि सीओ क्या दस-बीस हजार रिश्वत लेता है।इन बातों का महत्व मात्र इतना है कि सरकार कुछ करती दिखाई देती है। इसे शायद कार्रवाई कहा जाता है।