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पिरान कलियर के इमाम साहब दरगाह की 34 न0 गुल्लक से सड़े गले नोट निकलने का रहस्य कब होगा दूर।वीडियो व फोटो में कोई भी दरगाह कर्मी ड्यूटी पर नही तैनात।

रुड़की /पिरान कलियर।
अनवर राणा!
जैसे ही बेईमानी की हवा,,,कइयों का ईमान का विमान उड़ गया
कुछ इस तरह का ही मामला
पिरान कलियर दरगाह प्रबंधन की लापरवाही के वैसे तो बहुत मामले जिला प्रशासन व ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के संज्ञान में लगातार पहुंच रहे है।जिनमे से कुछ मामलों में कार्यवाही ओर बड़े भृष्टाचारियो के मामले जानबूझकर व दरगाह प्रबंधन की मिली भगत से बसताये खामोशी में रख दिया जाता है,जिनको लेकर दरगाह अक़ीददत मन्द व क्षेत्रीय लोगो में अनेक चर्चा होती रहती है।पिछले दिनों प्रशासन के कर्मचारियों द्वारा दानपत्रों की गिनती साबरी गेस्ट हाउस में की जा रही थी।उसी दौरान गुल्लक न0 34 जो दरगाह इमाम साहब से पल होकर दरगाह कार्यालय व प्रशासन के अधिकारी द्वारा स्टोरनगरूम में रखी हुई थी।उस गुल्लक न0 34 से रहस्य मय स्थिति में पानी डालने से सड़े गले नोट निकले जिसकी वीडियो बनाकर तुरन्त नायाब तहसीलदार देशराज के द्वारा उच्च अधिकारियों को सूचना दी गयी थी।लेकिन आज तक उसका रहस्य बरकरार चला आ रहा है।प्रशासन व दरगाह प्रबंधन की माने तो स्टोरनगरूम की खामी बताई गयी जबकि स्टोरनगरूम की गलती होती तो सब दानपत्रों में पानी की वजह दिखाई देंती लेकिन एक ही गुल्लक के नोट खराब होने में किसकी गलती रही किसी दरगाह प्रबंतन्त्र ने कोई जांच नही की।जिससे दरगाह प्रबंधतंत्र की मिली भगत होने का पूरा अंदेशा लोगो में चर्चा का विषय बना हुआ है।लोगो का कहना तो यहां तक है की जिस समय यह गुल्लक न034 इमाम साहब में जायरीनों के लिये रखी गयी थी उस वक्त एक फोटो व वीडियो से साफ हो रहा है कि कोई भी दरगाह कर्मी मौजूद नही होता था बल्कि बाहरी लोग ड्यूटी देकर नोट चादर व दूसरी जगह पर रखवाकर आपस में कर्मियों के साथ मिलकर बाँट देते थे और उस में से तत्कालीन प्रबंधक व अन्य सुपरवाइजरों का हफ्ता भी चला जाता था।ऐसा भी नही उन लोगो का यह तर्क गलत हो क्योंकि जो फोटो इस समाचार के साथ में डाल रहा हुन इस बात का पक्का प्रमाण है की कोई भी दरगाह कर्मी वहां पर मौजूद नही बस एक पी आर di ठठ्ठे मरता दिख रहा है।इस लिये इस बात से इंकार नही किया जाता कि इस गुल्लक न034 से सड़े गले नोट निकलने में भी दरगाह कर्मियों की सांठगांठ व बाहरी लोगो के प्यार से ही अंजाम दिया गया है,जिसकी जांच होनी दरगाह हित में जरूरी ही नही अति आवश्यक भी है अन देखना यह है की पन्द्रह दिन पहले हुई रहस्यमय घटना की जांच ज्वाइंट मजिस्ट्रेट करा पाएगी या अन्य मामलों की तरह यह लाखो रुपये का नुकसान बी बस्तएखामोशी में डाल दिया जाएगा।