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आज AAP नेता राघव चड्ढा के एक बयान से सारी साज़िश की पोल खुल गई। संकट की इस घड़ी में राजनीति करने वाले अरविन्द केजरीवाल और आम आदमी पार्टी को जनता कभी माफ़ नहीं करेगी।

दिल्ली

दिल्ली सरकार की हकीकत, हालाँकि,मैं इस पर लिखना नहीं चाहता था लेकिन चूँकि 3 दिनों से सोशल मीडिया पर यही शेयर हो रहा है,तो चीजें स्पष्ट करनी ज़रूरी है।
आज जो लोग मजदूरों के हितैषी बन रहे हैं,उनमें से अधिकतर ऐसे लोग हैं जो अपने घर में रह रहे किराएदारों से रेंट मिलने में एक दिन की भी देरी होने पर निकाल बाहर करने की धमकी देते हैं।

आज AAP नेता राघव चड्ढा के एक बयान से सारी साज़िश की पोल खुल गई। संकट की इस घड़ी में राजनीति करने वाले अरविन्द केजरीवाल और आम आदमी पार्टी को जनता कभी माफ़ नहीं करेगी।

चड्ढा ने आरोप लगाया है कि योगीजी दिल्ली से यूपी जाने वाले मजदूरों को दौड़ा-दौड़ा कर पिटवा रहे हैं। योगीजी कह रहे हैं कि तुम दिल्ली क्यों गए थे,अब तुम्हें कभी भी दिल्ली नहीं जाने दिया जाएगा। योगीजी ने कब ऐसा कहा?
जो व्यक्ति 1000 सैनिटाइज्ड बसें भेज कर लोगों को गंतव्य तक पहुँचाने में लगा हुआ है,उस पर ऐसा आरोप?
सच्चाई ये है कि लॉकडाउन का ऐलान होते ही मजदूरों के घर का बिजली-पानी काट दिया गया। अफवाह फैलाई गई कि 3 महीने तक उन्हें कुछ सुविधा नहीं मिलेगी।

दिल्ली सरकार की बसों में भर-भर कर उन्हें यूपी बॉर्डर तक किसने छोड़ा? आप सरकार ने। सारी समस्या यूपी के ऊपर डाल दी गई और ‘उलटा चोर कोतवाल को डाँटे’ की तर्ज पर रोना शुरू हो गया। ये वही लोग हैं जो दलितों, महिलाओं, दिव्यांगों और LGBT समुदाय को ‘बलि का बकरा’ बनाते रहे हैं,अबकी मजदूरों की बारी है।

आज अगर दिल्ली में कोई ऐसे लोगों की मदद कर रहा है तो उसमें तेजिंदर बग्गा और कपिल मिश्रा जैसे लोग हैं,संघ के स्वयंसेवक है,भाजयुमो के नेता हैं और भाजपा के हारे हुए लोग हैं।

लेकिन,दोष किसको?
जिसे बेइज्जत कर के हरा दिया, जो तब भी लगा हुआ है,दोष उसको ही?

फिर आते हैं वो घोंचू लोग जो कहते हैं कि मोदी को ‘तैयारी’ कर के घोषणा करनी चाहिए। उसी ‘तैयारी’ के बीच अगर लाशें गिरने लगे तो यही लोग कहेंगे कि जल्दी क्यों नहीं किया? यानी चित भी मेरी और पट भी मेरी।

लॉकडाउन की घोषणा 12 घंटे पहले होती तो और बड़ा हाहाकार मचता क्योंकि वो भी घर जाने को निकल पड़ते,जो ख़ुशी से रह रहे हैं। भयानक अराजकता का माहौल बन जाता। क्योंकि तैयारी पूरी थी…लॉकडाउन का मतलब होता है कोई एक प्रदेश से दूसरे प्रदेश नहीं जाएगा। फिर दिल्ली सरकार ने सबको यूपी में क्यों ढकेल दिया?

लेकिन नहीं, हम तो चमचे हैं, मोदी को ही कोसेंगे।।।।
कश्मीरी छात्र मौत के मुँह से निकल कर उसी मोदी को धन्यवाद कर रहे हैं, लगातार जनसेवा में लगी नर्सें उन्हें देवता बता रही हैं लेकिन कुछ लोगों को खालीपन के कीड़े ने ऐसा काटा है कि उसी आदमी को गाली दे रहे हैं,केवल जो इस चिंता में लगा हुआ है कि 130 करोड़ के देश को मौत के जबड़े से कैसे निकाला जाए……रामायण-महाभारत का प्रसारण हो रहा है ताकि लोग घरों में रहें लेकिन कइयों को इससे भी दिक्कतें हैं। आजकल हर एक चीज को दूसरे से जोड़ने का चलन है।

जैसे, थाली बजाने को कनाडा के प्रधानमंत्री के किसी भाषण से जोड़ के ये दिखाओ कि वहाँ पैकेज की घोषणा हुई,यहाँ घंटी बजवाया जा रहा……जब यहाँ पैकेज की घोषणा हुई तो चुप्पी साध लो। किसी मंत्री की रामायण देखते हुए फोटो लेकर उसको मजदूरों के पलायन से जोड़ दो कि देखो, मजदूर जा रहे और फलाँ मंत्री टीवी देख रहा। फिर जब यूपी में उन्हीं मजदूरों के लिए सारी व्यववस्था की गई तो चुप्पी साध लो। ये एक सोचा-समझा तिकड़म था, जिसके तहत अफवाहों का बाजार गर्म कर के ग़रीबों को उकसाया गया और उन्हें आगे कर के हथियार बनाया गया।

बेंगलुरु से तमिलनाडु की सीमा 40 किलोमीटर से भी कम है। चेन्नई से आंध्र प्रदेश की सीमा 100 किलोमीटर से भी कम है। वहाँ मजदूरों का पलायन क्यों नहीं हुआ? क्योंकि वहाँ कोई ऐसी साज़िश नहीं रची गई। ख़ून बहा कर राजनीति करने की इनकी पुरानी रणनीति है।

सचेत रहिए, पोल खोलिए और दूसरों को भी सचेत कीजिए। और जो मजदूरों के नए-नवेले हितैषी बन कर घूम रहे हैं, उनसे बोलिए कि केजरीवाल से सवाल करें और योगी को धन्यवाद दें। नहीं तो आजकल मोदी की उपलब्धियाँ गिनाने पर तर्कहीन लोग ये जवाब देते हैं- “अरे एहसान थोड़े किया है। हमारा ही तो पैसा है।”
मैं भी जवाब देता हूँ कि तुम्हारे थोड़े हैं, तुम्हारे दादा के बाप का है।

लेख– अनुपम के. सिंह